6 महीने में उजड़ गई सरकारी पौधारोपण योजना
बलरामपुर: पौधरोपण के नाम पर भ्रष्टाचार की 'खेती', 15 लाख खर्च पर 90% पौधे मृत; कागजों में ही बँट गई खाद और दवा
राजपुर (बलरामपुर): छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के धंधापुर ग्राम पंचायत में उद्यान विभाग की एक बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। मनरेगा और सरकारी फंड से करीब 15 लाख रुपये खर्च कर किया गया पौधरोपण महज 6 महीने के भीतर ही बर्बाद हो गया है। देखरेख के अभाव और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े इन पौधों में से 90 प्रतिशत अब सूख कर खत्म हो चुके हैं।
एक ही जमीन, बार-बार पौधरोपण और बार-बार विफलता
हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर उद्यान विभाग ने हाल ही में फलदार पौधे लगाए थे, उसी जमीन पर पिछले 10-15 वर्षों में दो बार पहले भी पौधरोपण किया जा चुका है।
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इतिहास: 2005 में 'रतनजोत' और 2011 में 'राष्ट्रीय रेशम बोर्ड' द्वारा यहाँ अर्जुन के पौधे लगाए गए थे, जो भ्रष्टाचार की वजह से कभी पनप नहीं पाए।
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वर्तमान स्थिति: साल 2025-26 में तीसरी बार यहाँ लाखों खर्च किए गए, लेकिन नतीजा वही रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जमीन अब पौधरोपण के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन की बंदरबांट के लिए 'भ्रष्टाचार की रोपणी' बन गई है।
सिंचाई और खाद के बिना दम तोड़ते पौधे
जांच में पता चला है कि पौधों को लगाने के दौरान नियमों को ताक पर रखा गया:
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सिर्फ गड्ढे खोदे गए: नियमानुसार खाद और कीटनाशक का प्रयोग करना था, लेकिन सिर्फ गड्ढे खोदकर औपचारिकता पूरी की गई।
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सिंचाई की अनदेखी: मौके पर बोरवेल मौजूद है, लेकिन वह खराब पड़ा है। विभाग ने इसकी मरम्मत कराना तक जरूरी नहीं समझा, जिसके परिणामस्वरूप 40 डिग्री तापमान में बिना पानी के पौधे झुलस गए।
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कागजी खानापूर्ति: आरोप है कि कीटनाशक और खाद का छिड़काव सिर्फ कागजों पर ही दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत में पौधों को दीमक खा रहे हैं।
घटिया निर्माण: फेंसिंग पोल की गुणवत्ता पर सवाल
पौधों की सुरक्षा के लिए डीएमएफ (DMF) मद से यहाँ फेंसिंग कराई गई थी, लेकिन उसमें इस्तेमाल किए गए सीमेंट पोल की क्वालिटी बेहद निम्न स्तर की है।
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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ये पोल कभी भी टूटकर गिर सकते हैं।
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गंभीर बात यह है कि मानकों के विपरीत काम होने के बावजूद विभागीय इंजीनियरों ने इसका मूल्यांकन कर पूरा भुगतान भी पास कर दिया।
अधिकारियों की चुप्पी और भ्रष्टाचार को मौन सहमति
ग्रामीणों ने पहले भी इस गड़बड़ी की शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की इसी चुप्पी ने विभाग को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे दी है। अब धंधापुर में चारों तरफ केवल सूखे हुए डंठल और टूटे हुए सीमेंट पोल ही नजर आ रहे हैं, जो सरकारी खजाने की बर्बादी की गवाही दे रहे हैं।


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