मरीजों की जिंदगी खतरे में डालने वाला गिरोह बेनकाब, दमोह में दो गिरफ्तार
दमोह | मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बार फिर नकली डॉक्टरों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। शहर की सुभाष कॉलोनी में संचालित 'संजीवनी क्लिनिक' पर छापा मारकर पुलिस ने दो कथित डॉक्टरों को दबोचा है। ये दोनों आरोपी एलोपैथिक चिकित्सा की सर्वोच्च एमबीबीएस (MBBS) डिग्री का दावा कर लंबे समय से क्षेत्र के मासूम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे। गुप्त शिकायत के बाद जब प्रशासनिक स्तर पर इनके दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, तो दोनों की डिग्रियां पूरी तरह जाली पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर दोनों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस ने कसा शिकंजा
इस पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी देते हुए दमोह के पुलिस अधीक्षक (SP) आनंद कलादगी ने बताया कि सुभाष कॉलोनी स्थित संजीवनी क्लिनिक के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की विशेष टीम ने क्लिनिक का औचक निरीक्षण किया और वहां मौजूद डॉक्टरों के शैक्षणिक दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में दोनों आरोपियों की डिग्रियां फर्जी प्रमाणित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इन आरोपियों ने यह फर्जी डिग्रियां कहां से हासिल की थीं।
एक ही साल में दूसरा बड़ा खुलासा, मिशन हॉस्पिटल का 'कार्डियोलॉजिस्ट' भी निकला था फर्जी
दमोह में फर्जी डॉक्टरों के नेटवर्क का भंडाफोड़ होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक साल के भीतर ही जिले में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने पूरे चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है। इससे पहले दमोह के ही प्रतिष्ठित 'मिशन हॉस्पिटल' में बड़े स्तर पर धोखाधड़ी का ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां खुद को दिल का डॉक्टर (कार्डियोलॉजिस्ट) बताने वाला कथित चिकित्सक एन. जॉन केम पकड़ा गया था। जांच में उसकी विशेषज्ञता की डिग्री पूरी तरह फर्जी पाई गई थी, और वह आरोपी डॉक्टर फिलहाल जेल में अपनी सजा काट रहा है।
रडार पर कई अन्य क्लिनिक, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
दमोह जिले में एक के बाद एक सामने आ रहे इन गंभीर मामलों ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सजग नागरिकों का कहना है कि आखिर बिना उचित वेरिफिकेशन के ऐसे झोलाछाप और फर्जी डॉक्टर बड़े-बड़े अस्पतालों और क्लिनिकों में अपनी दुकानें कैसे खोल लेते हैं? लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए प्रशासन अब अलर्ट मोड पर है। एसपी आनंद कलादगी के मुताबिक, जिले में चल रहे अन्य निजी क्लिनिकों और संदिग्ध अस्पतालों की भी सूची तैयार की जा रही है, और आने वाले दिनों में ऐसे धोखेबाजों के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।


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