बिलासपुर में करोड़ों की सरकारी जमीन घोटाले की जांच तेज
Bilaspur News : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में करोड़ों रुपये की कीमत वाली सरकारी जमीन से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। इस घोटाले ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और जिला प्रशासन को आमने-सामने ला खड़ा किया है। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने SECL को वर्षों पहले आवंटित सैकड़ों एकड़ जमीन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
SDM मनीष साहू के नेतृत्व में जांच
यह जांच बिलासपुर SDM मनीष साहू के नेतृत्व में चल रही है। दूसरी ओर, SECL प्रबंधन ने जिला प्रशासन को एक पत्र भेजकर अपना पक्ष रखा है। SECL का कहना है कि सरकार ने वर्षों पहले सरकंडा, चांटीडीह, लिंगियाडीह सहित अन्य क्षेत्रों में मकान, दुकान, अस्पताल और संस्थान संचालित करने के लिए जमीन आवंटित की थी। इन जमीनों की कीमत अब करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है, लेकिन साल 2015 के बाद से लीज रिन्यूअल नहीं हो पाया है।
लीज रिन्यूअल की मांग
SECL के महाप्रबंधक ने 5 जनवरी 2026 को पत्र लिखकर बताया कि इन जमीनों पर SECL के कार्यालय, DAV स्कूल, इंदिरा विहार और बसंत विहार जैसी बड़ी कॉलोनियां बनी हुई हैं। यहां सैकड़ों परिवार रह रहे हैं। लीज रिन्यूअल नहीं होने के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं। इसी वजह से कंपनी ने सभी सरकारी जमीनों के पट्टे नवीनीकरण की मांग की है।
क्यों बढ़ा विवाद?
Bilaspur News के अनुसार, SECL के पत्राचार के बाद प्रशासन ने जब जमीनों की जांच शुरू की तो कई स्थानों पर नजूल भूमि और अलग-अलग श्रेणी की सरकारी जमीन सामने आई। SDM मनीष साहू ने बताया कि इन्हीं विसंगतियों के कारण 2015 के बाद लीज रिन्यूअल नहीं किया गया। पूरे मामले की जांच तहसीलदार स्तर पर कराई जा रही है।


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