“कर्म पर तुम्हारा अधिकार है , इसीलिए कर्म फल के लिए मत करो”!

“कर्म पर तुम्हारा अधिकार है , इसीलिए कर्म फल के लिए मत करो”!
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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ 
 -शैलेंद्र श्रीवास्तव
गीता के दूसरे अध्याय के श्लोक 47 में यह बताया गया है कि कर्म पर तुम्हारा अधिकार है लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं इसीलिए कर्म फल के लिए मत करो | आज के इस व्यस्ततम दौर में जिसे हम कलयुग कहते हैं हमारी व्यस्तता भरी जिंदगी में जब कार्य के लिए हमारे पास समय नहीं है | हमारी निर्भरता स्मार्ट डिवाइसेज जैसे मोबाइल, लैपटॉप, घड़ियां, कार, कंप्यूटर, विद्युत उपकरण तथा अन्य तकनीकी उपकरणों पर बढ़ती चली जा रही है |
मैनेजमेंट में टाइम मैनेजमेंट का जो आयाम है | उसमें एक नया आयाम जुड़ गया है जिसे हम स्मार्ट डिवाइस टाइम मैनेजमेंट भी कह सकते हैं।
हम स्मार्ट डिवाइसेज को ज्यादा समय देने लगे हैं | वह समय जो हमारी नींद और आराम के समय से भी ज्यादा होने लगा है | हमारी अन्य क्रियाओं से भी ज्यादा होने लगा है | स्मार्ट डिवाइसेज हमारे लिए कर्ण के कवच और कुंडल की तरह बन गए हैं | जिनके बिना हम अपना जीवन अधूरा सा मानने लगे हैं | हम यह भी नहीं ध्यान दे पा रहे हैं कि इस कर्म का क्या फल होगा और वह फल वाकई में बहुत ज्यादा खतरनाक है कई बीमारियां जैसे कैंसर, अकेलापन, आंखों की बीमारियां सिर्फ इन्हीं उपकरणों की ज्यादा इस्तेमाल के कारण होने लगी है |
गीता में कहा गया है कि कर्म कर फल की चिंता मत कर और मनुष्य ने श्लोक का गलत अर्थ निकाला है और वाकई में कोई भी इस भयावह और दर्दनाक फल की चिंता नहीं कर रहा है, जो जानता भी है वह भी समझने की कोशिश नहीं कर रहा है |
डिजिटल डिटॉक्स उस समय की अवधि को संदर्भित करता है जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से स्मार्टफोन कंप्यूटर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने से मना कर देता है
दुनिया की एक बड़ी कंसलटिंग फर्म डेलाइट द्वारा वर्ष 2015 में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि लगभग 59% स्मार्टफोन उपयोगकर्ता बिस्तर पर जाने से पहले और जागने की 30 मिनट के भीतर 5 मिनट में एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप फेसबुक टि्वटर इंस्टाग्राम इत्यादि जरूर देखते हैं
यह एक आम समस्या है जो लगभग हर घर में कई लोगों के साथ देख रहे हैं यह गलत बनती जा रही है जिससे कई बीमारियां एवं घर में भी तनाव की स्थिति बनती जा रही है
इस बीमारी से बाहर आने के लिए या इस समस्या को कम करने के लिए मोबाइल डिटॉक्स को अपनाया जा सकता है | हिंदी भाषा में डिटॉक्स का अर्थ है विशहरण अर्थात आप मोबाइल से ग्रसितहोने की समस्या को थोड़ी देर के लिए हर लेते हैं, या उसे खत्म करने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाते हैं
टेक्नोलॉजी के उपकरणों का सदा इस्तेमाल करने से विभिन्न शारीरिक तथा मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जैसे रात को ज्यादा देर तक मोबाइल या उपकरण देखने से नींद की गुणवत्ता में कमी आती है तथा आंखों में खिंचाव और अन्य दृष्टि सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न होना शुरू हो जाती है | इस कारण कई व्यक्तियों में सर दर्द या माइग्रेन की समस्या को देखा गया है |
70 फीसद लोगों ने डिजिटल आई स्ट्रेन का अनुभव किया
– पिछले कई शोधों में यह पाया गया है कि लगभग 70% लोगों ने स्क्रीन के बढ़ते उपयोग के परिणाम स्वरुप डिजिटल आई स्ट्रेन का अनुभव किया है |
स्क्रीन से निकलने वाला प्रकाश  मेलाटोनिन नामक हार्मोन के उत्पादन को कम कर देता है जो एक महत्वपूर्ण  जैव रासायन है | जो नींद चक्र की अवधि और चरित्र को नियंत्रित करता है।
इसे अपनाने के लिए हमें सर्वप्रथम अपने आप में कुछ बदलाव करने होंगे तथा अपने भीतर की कई जानकारियां इकट्ठी करनी होंगी |
1.  सर्वप्रथम हमें इंटरनेट की लत के व्यवहार को पहचानना होगा | हम कितनी देर मोबाइल का उपयोग करते हैं और किस तरह के कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है | जैसे सोशल साइट्स, इंटरनेट, ब्राउजिंग इत्यादि
 2.  मोबाइल के लगातार उपयोग करने से आपके जीवन में तनाव और चिंता धीरे-धीरे बढ़ने लगती है | इसकी पहचान करना तथा यह तनाव कैसे कम किया जाए इस पर विचार करना |
 3.  सामाजिक सहभागिता और कार्यों पर फिर से ध्यान केंद्रित करना जैसे वृक्षारोपण, साफ सफाई करना, घर के काम करना, मल्टी टास्किंग के सिद्धांत को कम करते हुए एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करना इत्यादि |
सोशल मीडिया से डिटॉक्स करना होगा शुरू
डिजिटल डिटॉक्स को शुरू करने के लिए हमें सबसे पहले सोशल मीडिया डिटॉक्स से शुरू करना होगा जिसमें स्वेच्छा से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर रहना शुरु करना होगा | आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप दिन भर में किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कितने समय के लिए करते हैं |  हम 1 दिन से इसको शुरू कर सकते हैं जिसमें हम पूरा दिन किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाए बिना अपने कार्य को संपादित कर सकते हैं | यदि आप पूरा दिन करने में असमर्थ हैं तो कोशिश करें जितना समय अभी आप देते हैं उस समय में आदि कटौती करें | यदि आप दिन भर में लगभग 5 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं तो कोशिश करें यह समय 2 घंटे कर पाए |
डिजिटल डिटॉक्स के बारे में की गई रिसर्च हमें क्या बताती है कि 
1. प्रौद्योगिकी तनावपूर्ण हो सकती है |
2. डिजिटल डिवाइस इस हमारी नींद में बाधा पैदा करती है |
3. डिजिटल डिवाइस का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जुड़ा हो सकता है |
4. लगातार ज्यादा समय तक डिजिटल डिवाइस के संपर्क में आने से यह लगातार डिजिटल डिवाइस इस पर कार्य करते रहने से जीवन का संतुलन प्रभावित होता है |
5. डिजिटल कनेक्टिविटी आपको ऐसा महसूस करा सकती है जैसे आप यहां होते हुए भी नहीं है या गायब हैं |
आप कैसे जान सकते हैं कि आपको डिजिटल Detox की आवश्यकता है
1.  यदि आप अपना फोन कहीं रखकर भूल गए हैं नहीं ढूंढ पा रहे हैं | तो आप चिंतित या तनावग्रस्त होने लगते हैं
2. आप हर कुछ मिनटों में अपने फोन की जांच करने के लिए अपने आप को मजबूर महसूस करते हैं | आप कभी व्हाट्सएप कभी फेसबुक या किसी और सोशल मीडिया को खोलकर बार-बार देखने लगते हैं |
3. आप सोशल मीडिया पर समय बिताने के बाद उदास, चिंतित या गुस्से में महसूस करते हैं | यह आपके स्वभाव में आंशिक बदलाव आने लगता है |
4. आप अपने सोशल पोस्ट्स पर लाइक, कमेंट या रिजेक्ट काउंट से परेशान हो जाते हैं |
5. यदि आप अपने डिवाइस की जाँच नहीं करते हैं, तो आपको डर है कि आप कुछ भूल रहे हैं |
6. आप अक्सर फोन पर समय बिताने के लिए रात को देर तक जागते हैं या सुबह जल्दी उठते हैं |
7. आपको अपने फ़ोन की जांच किए बिना एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है |
8. यह भी आपको परिवार के द्वारा फोन बंद करने के लिए कहा जाता है, तो आपको गुस्सा आता है या आपके स्वभाव में बदलाव होने लगता है |
जिंदगी का हिस्सा बन रहा डिजिटल 
कोविड-19 के दौरान यह देखने में आया है कि हमारे रोज की जिंदगी में डिजिटल डिवाइस की जगह बढ़ती ही जा रही है | यह डिवाइस हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण रोल अदा करती है | किंतु अब यह रोल की जगह जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं और हमारा अधिक से अधिक समय ले रही हैं जिससे हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है और हमें अपने आपको डिजिटल डेटोक्स करने की आवश्यकता है |
:- लेखक शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव, सायबर एक्सपर्ट और सेवानवृित आईपीएस हैं 
आपका फेसबुक पर ASK Shailendra Srivastava IPS 1986  नाम से पेज हैं। आप रविवार शाम लाइव आकर लोगों को सायबर अपराधों से संबंधित जानकारी भी देते हैं।

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