बारिश का मौसम भले ही चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने का काम करता हो, लेकिन यह अपने साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। इस मौसम में हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) काफी बढ़ जाती है और शरीर का तापमान भी बार-बार बदलता रहता है। ऐसे में उमस और चिपचिपी गर्मी से बचने के लिए अक्सर लोग घरों और कार्यालयों में एयर कंडीशनर (एसी) का तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस तक सेट कर देते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि मानसून के दौरान बहुत कम तापमान पर एसी का इस्तेमाल करना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश के दिनों में एसी का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया जाए, बल्कि जरूरत इस बात की है कि इसे सही तापमान और उचित तरीके से इस्तेमाल किया जाए। आइए जानते हैं कि मानसून के मौसम में एसी चलाते समय किन अहम बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

मानसून में कम तापमान पर AC चलाने के प्रमुख नुकसान

  • वायरल इंफेक्शन का बढ़ता खतरा: बरसात के दिनों में वातावरण में नमी अधिक होने की वजह से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। यदि कोई व्यक्ति बाहर की गर्म और उमस भरी हवा से सीधे बहुत ठंडे एसी वाले कमरे में प्रवेश करता है, तो शरीर को तापमान के अचानक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) प्रभावित होती है और सर्दी-जुकाम, फ्लू या अन्य वायरल संक्रमण की चपेट में आने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

  • गले में खराश और खांसी की समस्या: लंबे समय तक बहुत कम तापमान पर एसी चलाने से कमरे की हवा शुष्क हो जाती है। यह सूखी हवा नाक और गले की अंदरूनी परत को सुखा देती है, जिससे गले में खराश, खांसी, आवाज बैठना या जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जिन लोगों को पहले से ही एलर्जी, टॉन्सिल या गले के संक्रमण की शिकायत रहती है, उनके लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक हो सकती है।

  • एलर्जी और सांस संबंधी दिक्कतें: मानसून के मौसम में नमी के कारण एसी के फिल्टर और कूलिंग कॉइल पर धूल, फफूंदी (मॉल्ड) और अन्य सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं। यदि समय पर एसी के फिल्टर की सफाई न की जाए, तो मशीन चालू होने पर ये हानिकारक कण हवा में फैल जाते हैं। इससे बार-बार छींके आना, नाक बहना, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ या अस्थमा के मरीजों की समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।

  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द: अत्यधिक ठंडे वातावरण में ज्यादा देर तक बैठे रहने से मांसपेशियां सिकुड़ सकती हैं, जिसके कारण शरीर में जकड़न और अकड़न महसूस होने लगती है। गठिया (आर्थराइटिस), सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या कमर दर्द से पीड़ित लोगों के लिए यह ठंडी हवा असहजता बढ़ा सकती है। इसके अलावा, एसी की ठंडी हवा यदि लगातार सीधे शरीर पर पड़े, तो गर्दन, कंधे और पीठ में खिंचाव व दर्द की शिकायत हो सकती है।

मानसून के दौरान AC चलाने के सही और सुरक्षित तरीके

  • एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही सेट रखें।

  • कमरे की चिपचिपाहट और उमस को कम करने के लिए ड्राई मोड (Dry Mode) का उपयोग करें।

  • हर 15 से 30 दिनों के अंतराल पर एसी के एयर फिल्टर को अच्छी तरह साफ करें।

  • दिन में कुछ समय के लिए कमरे की खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन (शुद्ध हवा का संचार) जरूर करें।

  • एसी की ठंडी हवा का सीधा झोंका कभी भी सीधे शरीर पर न पड़ने दें।

  • शरीर में पानी की कमी (डिप्रीशन) से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीते रहें।

  • घर के बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या किसी भी प्रकार की एलर्जी से पीड़ित लोगों को अत्यधिक ठंडे तापमान के संपर्क में आने से बचाएं।