ट्रंप की नीति पर व्हाइट हाउस का बड़ा दावा, भारत को लेकर क्या आंकड़े?
नई दिल्ली। अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' टैरिफ नीति के एक साल पूरे होने पर बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नीति के तहत किए गए नए व्यापार समझौतों ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बदल दिया है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बनाया है।
एक साल में कितने व्यापार समझौते हुए?
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि 'लिबरेशन डे' के एक साल में 20 से अधिक नए व्यापार समझौते हुए, ट्रिलियन डॉलर के निवेश आए, दवाओं की कीमतें घटीं और वस्तु व्यापार घाटा कम हुआ। उनका कहना है कि यह बदलाव अभी शुरुआत है और आने वाले समय में इसके और बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे।
वस्तु व्यापार घाटे में आई कितनी कमी?
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका का वस्तु व्यापार घाटा सालाना आधार पर 24 प्रतिशत तक घटा है। यह भी दावा किया गया कि इस अवधि में हर महीने घाटा साल-दर-साल कम हुआ।
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा पिछले एक साल में 32 प्रतिशत और अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 46 प्रतिशत तक घटा है। पहली बार साल 2000 के बाद चीन अमेरिका का सबसे बड़ा घाटा वाला व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। यूरोपीय संघ के साथ भी घाटा लगभग 40 प्रतिशत घटा है, जबकि स्विट्जरलैंड के साथ अमेरिका ने 2012 के बाद पहली बार सरप्लस दर्ज किया है।
विदेशी उत्पादकों का बोझ पड़ने का दावा
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि टैरिफ का बोझ विदेशी उत्पादकों पर पड़ा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए निर्यातकों ने अपने उत्पादों की कीमतें घटाईं। सरकार के मुताबिक, यूरोपीय संघ, जापान, भारत, वियतनाम और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ 20 से ज्यादा समझौते हुए हैं, जो वैश्विक जीडीपी के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर करते हैं। इन समझौतों से कृषि, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों के लिए नए बाजार खुले हैं।
उद्योग क्षेत्र को लेकर क्या दावा?
उद्योग क्षेत्र में भी सुधार का दावा किया गया है। एपल, टोयोटा, माइक्रोन और फाइजर जैसी कंपनियों के निवेश से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है। 2025 में कोर कैपिटल गुड्स की शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जबकि 2026 की शुरुआत में दो साल बाद पहली बार मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में विस्तार दर्ज हुआ। अमेरिका ने 2025 में कच्चे स्टील उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनने का भी दावा किया है। मजदूरों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है प्राइवेट सेक्टर में औसतन 1,400 डॉलर से ज्यादा की वास्तविक वेतन वृद्धि दर्ज की गई।
भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में है शामिल
हालांकि, भारत के साथ व्यापार में तस्वीर थोड़ी अलग है। पिछले 12 महीनों में अमेरिका का भारत के साथ वस्तु व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में शामिल है। फरवरी 2026 में ही अमेरिका को भारत के साथ करीब 3.5 अरब डॉलर का घाटा हुआ।
क्या कहते हैं आंकड़े?
- इस अवधि में भारत से अमेरिका को 101.97 अरब डॉलर के सामान का आयात हुआ, जिसमें फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इन आयातों पर अमेरिका ने 12.34 अरब डॉलर की कस्टम ड्यूटी वसूली, जबकि औसत टैरिफ दर 12.12 प्रतिशत रही।
- फरवरी 2026 के मासिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 अरब डॉलर ज्यादा है, हालांकि यह 12 महीने के औसत से 11 प्रतिशत कम है।
- इस महीने कुल निर्यात 314.8 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 372.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वस्तु व्यापार में 84.60 अरब डॉलर का घाटा रहा, जबकि सेवाओं में 27.26 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज किया गया।
- आयात में तेज वृद्धि के पीछे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, कच्चा तेल और दवाओं की मांग रही, जबकि निर्यात में औद्योगिक सामग्री, प्राकृतिक गैस और सोने की शिपमेंट बढ़ी।


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