जीएसटी सुधार पर पूर्व वित्त मंत्री का सवाल, कहा- वजह ट्रंप टैरिफ है या चुनावी राजनीति
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने पोस्ट में लिखा है, जीएसटी को तर्कसंगत बनाना और कई वस्तुओं व सेवाओं पर दरों में कमी स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसमें 8 साल की देरी हो चुकी है। जीएसटी का वर्तमान स्वरूप और दरें क्या शुरू में ही लागू नहीं हो होनी चाहिए थीं। हम पिछले 8 सालों से जीएसटी के स्वरूप और दरों के खिलाफ लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन हमारी अपील अनसुनी हो गई। कांग्रेस के वरिष्ठ चिदंबरम ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती का स्वागत किया है लेकिन इसके साथ ही उसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया कि जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने में सरकार को 8 साल क्यों लग गए? सोशल मीडिया एक्स पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने पूछा है कि क्या जीएसटी की जो नई दें अब लागू की गई हैं। वे शुरू से ही नहीं लागू किया जाना चाहिए था?
सरकार के अचानक इस कदम के पीछे क्या कारण रहे होंगे। इस का अनुमान लगाते हुए चिदंबरम ने आगे लिखा है, ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि सरकार ने ये बदलाव अब क्यों किए...धीमी विकास दर? बढ़ता घरेलू कर्ज? घटती घरेलू बचत? बिहार में चुनाव? या ट्रम्प और उनके टैरिफ? या ये सब? उन्होंने कहा कि विपक्ष 2017 में जीएसटी की शुरुआत से ही इनके खिलाफ चेतावनी दे रहा था। बता दें कि एक दिन पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 56वीं जीएसटी परिषद ने चार स्लैब वाली टैक्स प्रणाली को बदलते हुए अब 5 और 18 फीसदी जीएसटी की दो दरें तय की हैं। नई दरें 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। इन बदलावों से छोटी कारें, बाइक और कई अन्य उपभोक्ता वस्तुएँ सस्ती हो जाएँगी। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टैल्कम पाउडर और हेयर ऑयल जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं पर भी अब 18 फीसदी की बजाय 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे ये सामान भी सस्ते हो जाएंगे। इनके अलावा साइकिल, बर्तन, दूध की बोतलें और बाँस के फ़र्नीचर जैसी वस्तुओं को भी अब 5 फीसदी के टैक्स स्लैब में ला दिया गया है। इसके अलावा कुछ वस्तुओं पर शून्य कर और कुछ पर 40 प्रतिशत कर भी होंगे। नयी व्यवस्था में अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध, छेना, पनीर, चपाती रोटी पराठा आदि पर कोई कर नहीं लगेगा। सभी देशी रोटियों (चपाती, पराठा, रोटी आदि) पर जीएसटी दर शून्य होगी। तैंतीस जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर भी जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर दीर्घकालिक रोगों के उपचार में प्रयुक्त तीन जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर जीएसटी पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। अन्य दवाओं पर पांच प्रतिशत कर लगेगा। व्यक्तिगत जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पर भी कोई कर नहीं होगा।


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