GDP आंकड़ों में झलकता भारत का बदलता चेहरा, अब सिर्फ उभरता नहीं बल्कि वैश्विक पावर
व्यापार : एसएंडपी ग्लोबल ने हाल ही में मजबूत आर्थिक विकास और बेहतर वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए, 18 वर्षों में पहली बार भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाकर 'बीबीबी' कर दी है। यह प्रगति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों के दीर्घकालिक तुलनात्मक विश्लेषण के बाद की गई है। 1975 से वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की निरंतर वृद्धि दिखी है। इस दौरान अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन और जर्मनी सहित प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव दिखे हैं।
1975 में भारत की कुल जीडीपी करीब 98 अरब डॉलर थी, इसके 2025 में बढ़कर 4527 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने बीते कई वर्षों में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की गिनती दुनिया के शीर्ष चार अर्थव्यवस्थाओं में होती है। भारत से अधिक जीडीपी केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी की है। आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2030 तक 6670 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है और भारत जीडीपी के मामले जर्मनी से आगे निकलकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि का सिलसिला 2030 तक जारी रहेगा। 1975 के बाद से प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं के सकल घरेलू उत्पाद की तुलना पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत छाप छोड़ सकता है। ये आंकड़े 1975 से 2022 तक के विश्व बैंक के आंकड़ों पर आधारित हैं। वहीं 2023 से 2030 की अवधि के लिए अनुमान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विश्व आर्थिक आउटलुक के आंकड़ों पर आधारित हैं।


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