हमेशा भारत में ही बसना चाहती हैं तस्लीमा, दिल्ली सबसे बेहतर शहर

हमेशा भारत में ही बसना चाहती हैं तस्लीमा, दिल्ली सबसे बेहतर शहर
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mp03.in डेस्क नेशनल क्राइम 

भारत सरकार द्वारा रेसीडेंस  परमिट एक साल बढ़ाए जाने के बाद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन अब  राहत महसूस कर रहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार उन्हें लंबा या स्थायी परमिट देगी। एक इंटरव्यू में नसरीन ने कहा ,’भारत मेरा घर है. मैं उम्मीद करती हूं कि मुझे पांच या दस साल का ‘रेसीडेंस परमिट’ मिल जाए ताकि हर साल इसे लेकर चिंता नहीं करनी पड़े। मैने पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी से 2014 में यह अनुरोध किया था क्योंकि मैं अपनी बाकी जिंदगी भारत में बिताना चाहती हूं। गृह मंत्रालय ने नसरीन का रेसीडेंस परमिट रविवार को एक साल के लिए बढ़ा दिया। स्वीडन की नागरिक नसरीन का ‘रेसीडेंस परमिट’ सन 2004 से हर साल बढ़ता आया है। उन्हें इस बार तीन महीने का ही परमिट मिला था लेकिन ट्विटर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इसे एक साल के लिए बढ़ाने का उनका अनुरोध मान लिया गया। नसरीन ने कहा,‘मुझे विदेशी मानते हैं लेकिन मैं इस धरती की बेटी हूं. मैं उम्मीद करती हूं कि सरकार मुझे स्थायी या लंबी अवधि का परमिट देगी। मैं 25 साल से निष्कासन की जिंदगी जी रही हूं और हर साल मुझे अपना घर छिनने का डर सताता है।  इसका असर मेरी लेखनी पर भी पड़ता है। उन्होंने दिल्ली में ही आखिरी सांस लेने की ख्वाहिश जताते हुए कहा,‘मुझे लगता है कि उपमहाद्वीप में दिल्ली ही ऐसा शहर है जहां मैं सुकून से रह सकती हूं। मैं पूर्वी या पश्चिमी बंगाल में रहना चाहती थी लेकिन अब यह संभव नहीं है। मैं दिल्ली में बाकी जिंदगी बिताना चाहती हूं. अगर आप मुझे भारतीय नहीं मानते तो मेरी बिल्ली तो भारतीय है, जो मेरी बेटी की तरह है और पिछले 16 साल से मेरे साथ है।

यूरोप को छोड़ भारत का चुना

नसरीन ने कहा ,‘मेरा घर, मेरी किताबें, मेरे दस्तावेज, मेरे कपड़े सब कुछ यहां हैं। मेरा कोई दूसरा ठौर नहीं है। मैं यहां बस चुकी हूं और भारत छोड़ने के बारे में सोचना भी नहीं चाहती। ‘ उन्होंने कहा ,‘मैं यूरोप की नागरिक हूं लेकिन यूरोप और अमेरिका को छोड़कर मैंने भारत को चुना है।

यह अभिव्यक्ति का स्वतंत्रता 

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है लेकिन नसरीन इससे इत्तेफाक नहीं रखती और उनका मानना है कि यहां दूसरे देशों की तुलना में काफी आजादी है।उन्होंने कहा कि विधान मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।आप सरकार की आलोचना कर सकते हैं।मैंने कई देशों में देखा है कि ऐसी स्वतंत्रता बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा,‘मैं यूरोप या अमेरिका की बात नहीं करती लेकिन इराक युद्ध के समय अमेरिका में कहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी ?’

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गौरतलब है कि लेखिका तस्लीमा नसरीन पूर्व में पेशेवर डॉक्टर रही हैं. उन्हें 1994 में बांग्लादेश से निर्वासित कर दिया गया था।  वे 1970  के दशक में कवि और लेखिका के रूप में उभरीं। वे 1990 में अपने खुले विचारों के कारण काफी प्रसिद्ध हो गईं।  वे अपने नारीवादी विचारों वाले लेखों, उपन्यासों एवं इस्लाम व अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिए जानी जाती हैं। वे नारीवादी विचारों और आलोचनाओं के साथ ही इस्लाम की “गलत” धर्म के रूप में व्याख्या करती रही हैं। वह प्रकाशन, व्याख्यान और प्रचार द्वारा विचारों और मानवाधिकारों की आजादी की वकालत करती हैं।

16 साल से भारत में रह रही नसरीन 

बीते  25 सालों से बांग्लादेश से निर्वासित प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन अपनी बाकी सारा जीवन भारत में बिताना चाहती हैं। तस्लीमा स्वीडन की नागरिक हैं और अस्थायी परमिट पर भारत में रह रही हैं।  वे 16 सालों से भारत में रह रही हैं। वह दिल्ली को सबसे बेहतर शहर मानती हैं और यहीं बसना चाती हैं।

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