किसानों की ज्यादा आत्महत्या वाले राज्यों को किसान आंदोलनों में प्रतिनिधित्व नहीं-एनसीआरबी

किसानों की ज्यादा आत्महत्या वाले राज्यों को किसान आंदोलनों में प्रतिनिधित्व नहीं-एनसीआरबी
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mp03.in संवाददाता नई दिल्ली

नये कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध को बीते आठ महीनों से दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) में उत्तर भारत के प्रमुख रूप से तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड के किसानों का प्रतिनिधित्व उनके मसलों पर चर्चा नहीं है। जबकि देश में सर्वाधिक किसानों की खुदकशी वाले राज्य हैं।  दिल्ली में चल रहाआंदोलन किसानों का है, किसानों के लिए है। किसानों के मसलों को लेकर किये जाने का दावा है।

लेकिन राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के आंकड़ों के बताते हैं कि , देश में सर्वाधिक किसानों की खुदकशी वाले राज्यों का इस आंदोलन में कोई प्रतिनिधित्व दिखायी नहीं देता है। न ही आंदोलनकारियों के मंच से जान देने वाले किसानों की मजबूरी की कभी चर्चा की गई। इतना ही नहीं लगातार तीन सालों में महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके अलावा इन राज्यों में किसान आंदोलनकारियों की पैठ भी दिखाई नहीं दी है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा किसानों ने किया सुसाइड

एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट को आधार मानें तो किसानों ने सबसे ज्यादा आत्महत्या महाराष्ट्र में की है। दूसरा नंबर कर्नाटक का है जहां सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। यही दो ऐसे राज्य हैं जहां तीनों सालों में 11 हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। महाराष्ट्र में 2017 में 2426, 2018 में 2239 और 2019 में 2680 किसानों ने आत्महत्या की तो कर्नाटक में 2017 में 1157, 2018 में 1365 और 2019 में 1331 किसानों की खुदकुशी के मामले आए।

नहीं होता मरने वाले किसानों का जिक्र

चौंकाने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र के आजाद मैदान से किसान नेताओं ने हुंकार भरी लेकिन उसमें महाराष्ट्र में खुदकुशी करने वाले किसानों का कहीं जिक्र नहीं था। इसी तरह किसान नेता राकेश टिकैत बेंगलुरू गए कर्नाटक बंद का आह्वान भी किया लेकिन उन्हें भी कर्नाटक में खुदकुशी करने वाले किसानों का दर्द नहीं दिखा।

चौथे पायदान पर मप्र 

किसानों की आत्महत्या में तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर की बात करें तो इसमें तेलंगाना मध्य प्रदेश और आन्ध्र प्रदेश के नाम आते हैं। साल 2019 में किसानों के आत्महत्या के मामले में तीसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश, चौथे पर तेलंगाना और 5वें नंबर पर पंजाब रहा। आंध्र प्रदेश में 628, तेलंगाना में 491 और पंजाब में 239 किसानों ने आत्महत्या की जबकि 2018 में तेलंगाना में 900, आंध्र प्रदेश में 365 और मध्य प्रदेश 303 किसान जान देने पर मजबूर हुए। 2017 में किसानों के आत्महत्या के ममाले में तेलंगाना (846), मध्य प्रदेश (429) और आंध्र प्रदेश (375) का नाम शामिल रहा।

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