मप्र पुलिस की 20 बटालियनों में छोटे मियां सुभान अल्लाह !

मप्र पुलिस की 20 बटालियनों में छोटे मियां सुभान अल्लाह !
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– प्रदेश की बटालियनों में एडिशनल एसपी रेंक के अफसरों को किया जा रहा सुपरसीड 
– डीएसपी अफसरों को असिस्टेंट कमांडेंट, जबकि सिनियर एडिशनल को डिप्टी कमांडेंट कहा जाता है 
 आदेश प्रताप सिंह भदौरिया, mp03.in भोपाल 
 मध्यप्रदेश पुलिस की वाहिनियों यानी बटालियनों में मजेदार बात सामने आयी है। आप  बेशक इसे ‘ छोटे मियां सुभान अल्लाह’ वाली बात कह सकते हैं।
जीहां, प्रदेश में पुलिस महकमें के हॉकफोर्स, आरएपीटीसी समेत 20 वाहिनियाें में एडिशनल एसपी स्तर के अफसराें को बरसों से सुपरसीड किया जा रहा है। अपनी तरह की अजीबो गरीब इस सुपरसीड वाली महकमें की इस अव्यवहारिक प्रक्रिया को हम यूं तफसील से समझाते हें। दरअसल, प्रदेश पुलिस  की 20 बटालियनों में सेवारत राज्य पुलिस सेवा के डीएसपी अफसरों को एडिशनल एसपी से ऊपर वाली पोस्ट दी जा रही है।  जबकि मप्र पुलिस के जिलों में डीएसपी अफसर को डिप्टी का औहदा मिलता है और उनके वरिष्ठ अफसर को एडिशनल एसपी कहा जाता है। लेकिन प्रदेश की बटालियनों में इससे एकदम उलट पदनाम बरसों से प्रचलन में हैं। बटालियन में डीएसपी अफसर को असिस्टेंट कमांडेंट कहा जाता है, वहीं बेचारे एडिशनल एसपी वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें जूनियर का पदनाम डिप्टी कमांडेंट बोला जाता है।
ऐसे हुआ मामला उजागर 
जबलपुर वाहिनी में पदस्थ एडिशनल एसपी स्तर के अफसर एसएस शुक्ला किसी सरकारी कार्य से पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के इंजीनियर के साथ जबलपुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उनके द्वारा डिप्टी कमांडेट का परिचय दिए जाने पर उन्हें कलेक्टर कार्यालय के सरकारी कर्मचारियों द्वारा डीएसपी रेंक का अफसर समझा गया। क्योंकि जिला पुलिस में डीएसपी को डिप्टी एसपी और जिला प्रशासन में डिप्टी कलेक्टर समझा जाता है। इस विसंगी को लेकर अफसर ने स्पेशल डीजी एसएएफ को लिखित आवेदन देकर पदनाम में संशोधन कर एडिशनल एसपी रेंक के अफसर को अस्सिटेंड कमांडेंट और डीएसपी अफसर के पद को डिप्टी कमांडेंट  किए जाने की मांग की। इसी प्रस्ताव को एसएएफ मुख्यालय द्वारा पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा भेजा गया। जहां से उक्त प्रस्ताव को आगामी कार्रवाई के लिए प्रशासनिक शाखा ने योजना शाखा को भेजा है। जहां प्रस्ताव विचार के लिए लंबित है।
मप्र में बटालियन
– 1 वीं वाहिनी – इंदौर
– 2 वाहनी – ग्वालियर
– 5 वीं वाहनी – मुरैना
– 6 वीं वाहनी – जबलपुर
– 7 वीं वाहिनी – भोपाल
– 8 वीं वाहिनी छिंदवाड़ा
– 9 वीं वाहनी – रीवा
– 13 वाहिनी – ग्वालियर
– 14 वाहिनी – ग्वालियर
– 15 वीं वाहनी – इंदौर
– 17 वीं वाहनी – भिंड
– 23 वीं वाहिनी – भोपाल
– 24 वाहिनी – जवरा, रतलाम
– 25 वीं वाहिनी – भोपाल
– 29 वीं वाहनी – दतिया
– 32 वाहिनी – भोपाल
– 34 वीं वाहिनी – धार
– 35 वीं वाहनी – मंडला
– मप्र हॉक फोर्स – भोपाल
– आरएपीटीसी – इंदौर
इनका कहना -: 

– इस संबंध में प्रशासन या एसएएफ से कोई पत्र व्यवहार हुआ है, फिलहाल संज्ञान में नहीं है। योजना शाखा के संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर मंगाई जाएगी।

अनिल कुमार, एडीजी प्लानिंग
अनिल कुमार, एडीजी प्लानिंग  

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