रास्ते में छेडऩे पर लेडी सिंघम एसआई ने टोका तो मनचलों ने दिखाई गुण्डई

रास्ते में छेडऩे पर लेडी सिंघम एसआई ने टोका तो मनचलों ने दिखाई गुण्डई
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– इंसाफ दिलानेवालों को लगाना पड़ रही है इंसाफ के लिए गुहार

गुण्डों को शामत की बजाए सत्कार आखिर किसकी सरपरस्ती से?

Mp03.in, संवाददाता मंदसौर( गौरव तिवारी)
इन्दौर के सावेर थाने में पदस्थ एक महिला एसआई गत तीन दिनों से परेशान हैं। पहले दिन उसे शारीरिक प्रताडऩा दी गई और उसके बाद से अब तक उसे मानसिक प्रताडऩा दी जा रही है। शारीरिक प्रताडऩा देने वाले तीन मनचले थे। जिनके खिलाफ माधवनगर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया। इनमें से दो मौके पर ही गिरफ्तार कर लिए गए थे और एक भाग निकला था।

दरअसल महिला एसआई उज्जैन निवासी और इंदौर के एक देहात थाने में पदस्थ है। इसी थाने में उज्जैन निवासी आरक्षक पंकजसिंह भी पदस्थ है। महिला एसआई अपने सेठीनगर स्थित घर पर थी और आरक्षक पंकजसिंह थाने पर था। महिला एसआई को पता था कि आरक्षक पंकजसिंह देर शाम अपने गांव जाएगा। जिस पर उसने फोन लगाकर आदेश दिया कि पंकज एक काम करना कि वहां जाकर ये-ये सब्ज़ी और सामान ले-लेना और उज्जैन आकर मुझे दे-देना। आरक्षक पंकज सिंह ने निवेदन किया कि मैडम मैं आपको सजी और सामान लाकर दे दूंगा लेकिन आप विक्रमनगर हाईवे तक आ जाना। जिस पर मैं भी सीधे अपने गांव निकल सकूंगा। जिस पर अपनी कार से आरक्षक विक्रमनगर पहुंचा और एसआई भी घर के केजुअल कपड़े पहनकर कार से वहां अपना सामान लेने पहुंची। वे सजी और सामान इस गाड़ी से उस गाड़ी में रखते हुए थाने की रूटीन चर्चा भी कर रहे थे। इसी दौरान बाइक पर आए तीनों में से किसी एक मनचले ने कमेंट्स पास किया। इसे सुनकर महिला एसआई को गुस्सा आया और उन्होंने मनचलो को ललकारा। चूंकि एसआई वर्दी में नहीं थी इसलिए मनचले पहचान नहीं सके। संभवत: मनचले नशे में भी थे इसलिए उन्हें कुछ समझ नहीं आया कि वे किसके साथ छेडख़ानी कर रहे हैं। जिसके बाद एसआई ने ही मौके पर 100 डायल बुलवाई। जिसके बाद मौके पर दो आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए और एक भाग निकला जो कि बुधवार को धरा गया। कुल मिलाकर ये ही मौके की ओरिजनल हकीकत है। दोनों पक्ष एक-दूसरे को जानते नहीं थे। महिला एसआई व आरक्षक भी सिविल कपड़ों में थे। इसलिए मनचलों ने अपने हिसाब से कहानी बना छेड़छाड़ की व फिर मारपीट की।

*३००-५०० वालों ने बेच रखा है जमीर*
मानसिक प्रताडऩा देने वाले 300-500 रुपए वाले हैं। इन्हें इसका बिल्कुल भी ज्ञान नहीं कि कौन सी तस्वीर सोशल मीडिया पर डालनी चाहिए या फिर नहीं। क्या लिखना चाहिए और क्या नहीं ? इससे इन्हें कोई मतलब नहीं यदि 300-500 रुपए इनकी जेब में किसी ने रख दिए तो ये सब कुछ छोड़कर झूठ को सच साबित करने में लग जाते हैं। फिर भले ही बाद में जेल जाकर ये 3-3 लाख रुपए खर्च कर आए।

बाइट के नाम पर मानसिक प्रताडऩा, छवि धूमिल करने के हथकण्डे
300-500 वालों द्वारा लगातार किए जा रहे मोबाइल से और ये पूछे जाने पर कि इसमें आपका क्या कहना है? इससे महिला एसआई मानसिक रूप से परेशान है। सभी को ये ध्यान रखना चाहिए कि एसआई से पहले वह एक महिला भी है। उसी के साथ पहले छेड़छाड़ की गई। इसका विरोध किया तो मौके पर मारपीट की गई और अब उसकी वर्दी पर दाग लगाए जाने के लिए अपनाए जा रहे हैं ये सब हथकंडे।

*वीडियो क्लिप की सच्चाई*
300-500 रुपए वालों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो । क्लिप छोड़ी है जिसमें ये बता रहे हैं कि एसआई ने शराब पी रखी है। यदि वीडियो क्लिप देखेेगे तो समझ आएगा कि उसके साथ जमकर मारपीट की गई और घायल अवस्था में लडख़ड़ाकर वह हताश होकर बैठ जाती है। जिसके बाद सादी वर्दी में आरक्षक कार से डंडा निकालता है और मनचलों को धमकाता है। उसे गौर से देखेंगे तो स्पष्ट समझ आएगा कि उसने शराब नहीं पी रखी थी। छेड़छाड़ करनेवाले एक युवक ने महिला एसआई को धक्का दिया था जिससे वह गिर गई थी। 300-300 रुपए वाले महिला एसआई के कपड़ों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। जबकि उसने घर की केजुअल ड्रेस नेकर व टी-शर्ट पहन रखी है और वह कार से वहां तक पहुंची थी। फिर भी ये उसके कपड़ों को लेकर ऊल-जुलूल सवाल खड़े कर मानसिक प्रताडऩा दे रहे हैं। इन्होंने कांट-छाट कर वीडियो जोड़ा है कि महिला एसआई गाली बक रही है। तो भैया उसे छेड़ोगे तो क्या वह आरती उतारेगी। स्वाभाविक है कि वह गाली ही बकेगी। इस तरह महिला एसआई की वर्दी पर दाग लगाने के लिए और भी प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

*शराब की खुमारी नहीं कोविड की वीकनेस से लडख़ड़ाई थी महिला एसआई*

वीडियो में लडख़ड़ाती हुई महिला एसआई पर अज्ञानी सवाल दाग रहे हैं वो नशे की हालत में लडख़ड़ाई थी जबकि हकीकत तो ये है कि महिला एसआई की टेस्टिंग रिर्पोट से ये साफ हो चुका है कि उसने शराब नहीं पी थी। वहीं mp03.in न्यूज की टीम ने इस संबंध में पड़ताल की तो महिला एसआई द्वारा बकायदा कोविड पॉजिटिव्ह होने का प्रुफ स्वयं के मोबाइल पर १४ अप्रैल २०२१ को आए एसएमएस दिखाकर दिया गया गया जिसका स्क्रीन शॉट खबर के साथ संलग्न है।

*३००-5०० वालों की डेढ़ अल की खुली कलई*

इंदौर में पदस्थ जिस महिला एसआई से छेड़छाड़ व मारपीट के आरोपी 300-५00 वालों को मासूम नजर आ रहे हैं। उनमें अभी मुख्य आरोपी दीपक पिता पुुुरषोत्तम पडियार
खोजे हैं। जिनमें महिला एसआई से छेड़छाड़ व मारपीट मिलाकर कुल 6 अपराध हो जाएंगे। 300-500 वालों की नजर में मासूम इस अपराधी के वैसे ज्यादा बड़े अपराध नहीं हैं। सिर्फ इसने साथियों के साथ घर में घुसकर तोडफ़ोड़ की मारपीट की, अपशब्द कहे हैं। जान से मारने की धमकी दी हैं और घर में घुसकर हफ्ता वसूली की हैं। इसी प्रकार माधवनगर पुलिस को ये भी जानकारी लगी है कि इसके चिमनगंज व देवासगेट थाने में कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। कुल मिलाकर माधवनगर पुलिस महिला एसआई से छेड़छाड़ व मारपीट में इस आरोपी दीपक पडियार सहित अन्य आरोपी प्रदीप पिता ज्ञानसिंह पाल व मयंक पिता विष्णु भदेरा दोनों निवासी रामीनगर के पुराने आपराधिक रिकार्ड भी खंगाल रही है।

गिरा रखी है मीडिया की साख?*

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे मार्कडेय काटजू ने एक बार बयान दिया था कि देश का दुर्भाग्य है कि यहां 80 प्रतिशत मीडिया कम पढ़ी लिखी है। उनके इस बयान के अगले दिन कुछ मीडियाकर्मी उनके खिलाफ तखती लेकर दिल्ली की सड़क पर नारेबाजी करने निकल गए थे।
जिस पर फिर उनसे पूछा गया कि आपने ये कैसा बयान दे दिया कि आपके खिलाफ मीडिया नारेबाजी कर प्रदर्शन कर रही है। जिस पर फिर उन्होंने बयान दिया था कि मैंने कहा था कि 80 प्रतिशत मीडिया कम पढ़ी है। नारेबाजी कर रहे ये लोग उन्हीं 80 प्रतिशत में से ही हैं। यदि ये खुद को 20 प्रतिशत में मुकव्वल पढ़ा-लिखा मानते तो ये यहां नारेबाजी नहीं करते बल्कि किसी जरुरी मुद्दे का कवरेज कर रहे होते। 300-५00 रुपए के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिन्हें लगा कि वे 300-५00 वाले हैं, उन्होंने खुद ही अपने मंच से चिल्लाकर सबूत शासन-प्रशासन को दे दिए। अब बात करते हैं मुद्दे की।

सच्चाई की कीमत क्या जानें 300-500 में बिकनेवाले

300-500 रुपए वालों से सारे पत्रकार भी बेहद दु:खी हैं। ये किसी से भी 300-500 रुपए लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख सकते हैं। जिससे पत्रकारों को सही खबर का पता लगाने के लिए बहुत परेशान होना पड़ता है। उदाहरण के लिए ये 300-500 रुपए वाले देशी क्वार्टर मारकर सोशल मीडिया पर इतना लिख देते हैं कि ‘फलाँ जगह पर गोली चली, प्लीज चेक।’
जिस पर क्राइम रिपोर्टर जो पहले से किसी खबर पर कई दिनों या सुबह से रिर्पोटिंग कर रहे होते हैं उनकी सारी प्लानिंग धरी रह गई और गोली चलने जैसी शगूफा छोडऩेवाले फेक खबरों का पता लगाते-लगाते कई बार आधी रात ही गुजर जाती है। इसी प्रकार इन 300-५00 रुपए वालों ने महिला एसआई को मानसिक रूप से परेशान करने व उसकी वर्दी पर दाग लगाने के कुछ इसी तरह के हथकंडे अपनाए हैं।

एसआई ने बयाँ की प्रताडऩा, इंसाफ की लगाई गुहार
उज्जैन । पुलिस थाना माधवनगर में तीन युवकों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराए जाने के बावजूद भी वे तीन युवक मोबाइल से बना हुआ वीडियो वायरल कर सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर मुझे प्रताडि़त कर रहे हैं ।जिसके लिए में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मीडिया और पुलिस प्रशासनिक केे जिम्मेदार अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रही हूं। मेरा नाम सपना डोडिया है और में इंदौर जिले के सांवेर पुलिस थाना में एसआई के पद पर पदस्थ हूं। मेरी माता जी कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से देखरेख के चलते मेरी भी तबीयत खराब हो गई थी ऐसे में सांवेर में पदस्थ आरक्षक से दवाइयां
सब्ज़ी और फल मंगाए थे, जो 30 अप्रैल की रात को आरक्षक लेकर पहुंचा। में सेठी नगर क्षेत्र में रहती हूं और आरक्षक को अपने गांव की ओर जाना था। ऐसे में विक्रम नगर ब्रिज के चौराहे पर में पहुंची ।रात का समय था ऐसे में नाइट ड्रेस में ही दवा और सब्जियां लेने पहुंच गई। इसी दौरान बाइक क्रमांक एमपी 13 E M 4670 से 3 युवक वहां से गुजरे व मुझे अश्लील कमेंट करते हुए गाड़ी रोक दी।मेने उन्हें तुरंत मौके से जाने के लिए कहा तो वे अभद्रता करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए ।तीनों युवकों ने मेरे साथ हरकतें की और मुझे धक्का भी दे दिया। इससे मेरे हाथ और पैर पर चोट लगी अचानक हुयी घटना से मेरा लड प्रेशर डाउन हो गया व मुझे चक्कर आने लगे, तीनों युवक मोबाइल से वीडियो भी बनाते रहे। इसी दौरान मेने डायल हंड्रेड कर पुलिस बुलाई मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों का नाम पूछा तो दीपक पडियार, प्रदीप पाल, मयंक सिंह नाम पता चले। तीनो युवकों ने दो और लोगों को फोन करके मौके पर बुला लिया पुलिस कार्रवाई के दौरान तीन में से एक युवक अपनी दो पहिया वाहन लेकर फरार हो गया।माधवनगर थाना पुलिस ने दो युवकों को डायल हंड्रेड में बिठाया और में भी अपनी कार से माधवनगर थाना रिपोर्ट लिखाने के लिए पहुंची । पुलिस ने मेरा मेडिकल भी कराया। जिसमें मुझे लगी चोट का उल्लेख आया। मेरी मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार के नशे का कोई उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद अब तीनों युवक भ्रामक करने वाली कहानियां इधर-उधर बताते हुए मेरे खिलाफ फिर शिकायतें कर रहे हैं। ऐसे में मुझे मानसिक पारिवारिक और सामाजिक कष्ट उठाना पड़ रहा है। मुझे पता चला है कि जिन युवकों ने मेरे साथ मारपीट और विवाद किया था उसमें से दीपक पडियार के खिलाफ 2 पुलिस थाने में 6 केस दर्ज हैं और वह आदतन बदमाश है उसके और भी प्रकरण जुटाया जाना चाहिए साथ ही अन्य युवकों के विषय में भी पड़ताल की जाना चाहिए। इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मैं मीडिया और पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय चाहती हूं।
-सपना डोडिया (सब इंस्पेक्टर),उज्जैन

इनका कहना
महिला एसआई से छेड़छाड़ करनेवाले युवाओं द्वारा की शिकायत की जाँच कर ली गई है उनकी शिकायत आधारहीन है। अमूमन हर आरोपी इस तरह की शिकायत करता है। आरोपियों का पूर्व का भी आपराधिक रिकार्ड है।
महेश लोधा, टीआई माधवगंज थाना

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