बिल्डर ने अपनी जमीन के नजदीक सरकारी जमीन को रजिस्ट्री कराकर बेचा दिया

बिल्डर ने अपनी जमीन के नजदीक सरकारी जमीन को रजिस्ट्री कराकर बेचा दिया
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अपनी भूमि की रजिस्ट्री कराते हुए शासकीय भूमि बेची, दो पर मामला दर्ज
– पीड़ित पक्ष की एक महिला ने लोकायुक्त में की थी शिकायत, लंबी जांच के बाद निशातपुरा पुलिस ने दर्ज किया मामला
mp03.in संवाददाता भोपाल
 निशातपुरा पुलिस दो बिल्डर पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। उक्त प्रकरण लोकायुक्त में चली करीब दो साल जांच के बाद दर्ज किया गया। जांच में यह बात सामने आई कि दो बिल्डरों से शासकीय भूमि के पास भूमि खरीदी थी। अपनी भूमि को सुरक्षित रखते हुए पास ही सरकारी भूृमि पर करीब तीन दर्जन लोगों को मकान बेच दिए है। बिल्डरों पर अस्सी फीट रोड स्थित दुकानों को बेचने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार शिव मंदिर के पास अस्सी फीट रोड पर दुकानें बनी है। दुकान के पास कुछ मकान भी बने हैं। यह सभी मकान और दुकान शासकीय भूमि पर बने हैं। यह शिकायत मधु रैकवार पति मर्दन सिंह अहिरवार ने लोकायुक्त संगठन में की थी। लोकायुक्त ने शिकायती आवेदन की जांच की तो पता चला कि विश्वामित्र शर्मा ने यहां रक्बा नंबर 47 लिया था। उक्त रक्बा का पावर भारत सिंह राठौर को दे दिया था। भारत सिंह राठौर ने उक्त रक्बा में प्लॉट न बेचते हुए पास ही 30 नंबर के रक्बे में करीब दो दर्जन से ज्यादा प्लाट बेच दिए। अभी सभी प्लॉट पर मकान भी बन गए हैं। लोकायुक्त ने जांच के बाद विश्वा मित्र और भारत सिंह पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद और भी लोगों पर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जा सकती है।
किसानों को पट्टी पर मिली जमीन बेची
शाहपुरा पुलिस ने किसानों को मिली पट्टे वाली करीब पचास एकड़ जमीन बेचने वाले तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने आष्टा जिला सीहोर स्थित यह जमीन भोपाल की एक महिला को बेची थी। कुछ समय पहले महिला ने उक्त जमीन बेचने का प्रयास किया तो पता चला कि यह अहस्तांतरणीय यानी सरकारी जमीन है। इसे खरीदा अथवा बेचा नहीं जा सकता।
पुलिस के मुताबिक इस मामले की शिकायत शाहपुरा निवासी संध्या सिंह ने पुलिस से की थी। महिला ने पुलिस को बताया कि भोपाल निवासी आरके लालवानी, कांता लालवानी और राजू लालवानी ने वर्ष 2008 में जमीन को पॉवर आफ अटार्नी अपने नाम करवाकर उन्हें बेची थी। संध्या को जब पता चला कि उक्त जमीन किसानों की पट्टे वाली है तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस जांच में पाया गया कि जमीन सरकारी है, जिसे गलत दस्तावेज तैयार करके बेचा गया है। थाना प्रभारी महेंद्र मिश्रा ने बताया कि शिकायत के बाद आष्टा तहसीलदार जानकारी मांगी गई थी। उसमें पता चला कि पहली बार वर्ष 2004 में हस्तलिखित में भी सरकारी थी, लेकिन जब वर्ष 2008 में बेचा गया तो इसका नामांतरण करा दिया गया था।

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