मप्र पुलिस ने भेदा था आईएम (इंडियन मुजाहिदीन) का नेटवर्क

मप्र पुलिस ने भेदा था आईएम (इंडियन मुजाहिदीन) का नेटवर्क
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फांसी की सजा पाने वाले 38 आतंकियों में 6 भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 
अहमदाबाद ब्लास्ट के मुख्य आरोपी कयामुद्दीन को उज्जैन से किया था गिरफ्तार
जबकि इंदौर से पकड़ाए थे नागौरी ब्रदर्स समेत 13 लोग

mp03.in / धर्मेंद्र पैगवार                                                                 

पवन श्रीवास्तव, एडीजी
इंडियन मुजाहिदीन के जिन 38 लोगों को एक साथ अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। उनको पकड़ने में सबसे बड़ी भूमिका मध्य प्रदेश पुलिस ने निभाई थी। मध्य प्रदेश पुलिस ने इंडियन मुजाहिदीन को बम प्लांट करने के लिए अपना नेटवर्क उपलब्ध कराने वाले सिमी के कर्ता-धर्ता नागौरी ब्रदर्स समेत 13 लोगों को एक साथ इंदौर से गिरफ्तार किया था। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश की एंटी टेरेरिस्ट सेल ने अहमदाबाद और सूरत में जगह जगह बम रखने साजिश रचने वाले कयामुद्दीन कपड़िया को उज्जैन से पकड़ा था। कयामुद्दीन और नागौरी ब्रदर्स को भी फांसी की सजा सुनाई गई है।
गुजरात के गोधरा में हुए दंगों के बाद इस्लामिक आतंकवाद के नए मॉड्यूल का उदय इंडियन मुजाहिदीन के रूप में हुआ था। मुंबई का अब्दुल सुभान उर्फ तौकीर उर्फ  डॉक्टर ओर कर्नाटक के भटकल बंधुओं ने कश्मीरी आतंकवादियों के साथ मिलकर इंडियन मुजाहिदीन का गठन किया था। वर्ष 2008 और 2009 में इंडियन मुजाहिदीन ने अहमदाबाद के अलावा लखनऊ दिल्ली और जयपुर समेत कई शहरों में सीरियल ब्लास्ट किए थे। उस वक्त इंडियन मुजाहिदीन देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। सब मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने इंडियन मुजाहिदीन के सबसे बड़े गुट के 13 लोगों को एक साथ पकड़ कर देश की सभी एजेंसियों का काम आसान कर दिया था।
वर्ष 2008 में उस वक्त इंदौर के आईजी अनिल कुमार थे। श्री कुमार डीजी  लोकायुक्त के पद से रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इंडियन मुजाहिदीन जिसकी सभी एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था,उसी वक्त एक केंद्रीय एजेंसी से खुफिया जानकारी मिली की सफदर नागौरी कमरुद्दीन नागौरी केरल व कर्नाटक के कुछ लड़कों के साथ इंदौर और उसके आसपास छिपे हुए हैं। यह सूचना जब मिली उस दिन रंग पंचमी थी। हमने दो टीम बनाई एक इंदौर पुलिस की और दूसरी टीम में धार पुलिस के अफसर थे। सूचना मिलने के 2 दिन के अंदर ही 26 और 27 जुलाई 2008 को हमने जब सफदर नागौरी को पकड़ा तो यह इंडियन मुजाहिदीन की देश में पहली गिरफ्तारी थी। उसके साथ केरल के सिवली ओर शार्दूली सगे भाई भी थे। इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अहमदाबाद और जयपुर पुलिस ने इन से लगातार पूछताछ की इन्हें कई बार देश की अलग-अलग पुलिस ने रिमांड पर भी लिया इसके बाद ही पूरे देश में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की टीम ने मिलकर इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। वे कहते हैं कि अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने 38 आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अच्छी खबर है।

मुख्य साजिशकर्ता कयामुद्दीन उज्जैन से पकड़ाया था           

धर्मवीर सिंह यादव, एसपी सतना
अहमदाबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट का मुख्य षड्यंत्रकारी कयामुद्दीन ही था। उसने अहमदाबाद के अलावा सूरत में भी जगह जगह बम रखे थे। उस वक्त मध्यप्रदेश में एंटी टेरेरिस्ट सेल का गठन किया गया था जिसकी कमान तत्कालीन डीआईजी पवन श्रीवास्तव को दी गई थी। खुद डीआईजी पवन श्रीवास्तव और उस वक्त एटीसी में पदस्थ एसपी धर्मवीर सिंह यादव ने एक सूचना पर कई दिनों तक काम करने के बाद कयामुद्दीन को उज्जैन से गिरफ्तार किया था। कयामुद्दीन की गिरफ्तारी इंडियन मुजाहिदीन के लिए सबसे बड़ा झटका थी। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि कयामुद्दीन को पकड़ने के लिए जब घेरा डाला गया तो उस वक्त सिर्फ यह दोनों ही अफसर थे उनके साथ कोई अन्य जवान नहीं थे। उसी वक्त केंद्रीय एजेंसियों ने यह भी सूचना दी थी कि इंडियन मुजाहिदीन का मुख्य कर्ताधर्ता तौकीर उर्फ डॉक्टर भी मध्यप्रदेश में रहकर गया था।
भोपाल जेल में बंद है सात आरोपी, एक 2016 में मारा गया
जिन 38 लोगों को अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फांसी की सजा दी है उनमें से छह भोपाल जेल में बंद है और एक अन्य आरोपी जिसे आजीवन कारावास की सजा दी गई है वह अभी भोपाल जेल में ही है। अहमदाबाद ब्लास्ट का एक आरोपी वर्ष 2016 में भोपाल सेंट्रल जेल ब्रेक के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। जो आरोपी भोपाल जेल अंडा सेल में बंद है उनमें सफदर नागौरी शिवली सादुली हाफिज आमिल और कमरुद्दीन को फांसी हुई है। इनके अलावा अंसार को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
मध्य प्रदेश आतंकियों का बड़ा ठिकाना था
इंडियन मुजाहिदीन को स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया सिमी ने अपना नेटवर्क उपलब्ध कराया था। मध्यप्रदेश के भोपाल मालवा के उज्जैन और निमाड़ के खंडवा में सिमी की जड़ें बहुत गहरी थी। सफदर नागौरी खुद उज्जैन के महिदपुर का रहने वाला है। इसके अलावा सिम्मी का कुख्यात आतंकी अबू फैजल भोपाल के शाहजहानाबाद और जहांगीराबाद इलाके में कई दिनों तक रहा था। मध्य प्रदेश के मालवा और निर्माण के कई शहर सिमी के गढ़ रहे है।
अदालत नहीं अल्लाह की हुकूमत को मानता है नागौरी
शुक्रवार को भोपाल जेल में बंद अहमदाबाद के आरोपियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की गई थी। जैसे ही अदालत का फैसला आया आरोपियों ने अल्लाह हो अकबर के नारे लगाए और बाद में जेल के अफसरों से कहा कि उनका फैसला तो अल्लाह करेंगे वह अदालती फैसलों को नहीं मानते। बाद में जेल अफसरों ने उनकी काउंसलिंग भी की। सफदर नागौरी ने कहा कि वह भारत के संविधान और अदालतों को नहीं मानता है। सरदार और उसके सभी साथी भोपाल जेल में बनाए गए विशेष अंडा सेल में बंद है। यह लो ना तो जेल में होने वाले राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के कार्यक्रम में शामिल होते हैं ना ही दिवाली होली या किसी त्योहार पर बनने वाले भोजन को करते हैं। भोपाल जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे ने कहा कि यह सभी आतंकी भारतीय संविधान के प्रति अवहेलना करते हैं और उन में धार्मिक कट्टरता कूट-कूट कर भरी है उन्हें समय-समय पर काउंसलिंग दी जा रही है।
नोट -: लेखक इंदौर-भोपाल से प्रकाशित प्रजातंत्र अखबार के संपादक हैं

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