सेना व पैरामिलिट्री के बाद मप्र पुलिस के बेड़े में शामिल हुए ‘स्वदेशी डॉग्स’ !

सेना व पैरामिलिट्री के बाद मप्र पुलिस के बेड़े में शामिल हुए ‘स्वदेशी डॉग्स’ !
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mp03.in संवाददाता भोपाल 

सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वॉड (Dog squad) में स्वदेशी की राह पर चल पड़ी है। जीहां अबतक सेना और पैरामिलिट्री फोर्स ही देशी ब्रीड के डाग्स का इस्तेमाल करती थी, जिसके बाद मप्र पुलिस के डॉग स्क्वाड ने अब अपने बेडे़ में देशी  ब्रीड के कई डॉग भी शामिल कर लिए गए हैं। बता दें कि मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में देसी नस्ल के डॉग को पुलिस और सेना में शामिल करने की बात की थी। अभी तक  सिर्फ विदेशी नस्ल के कुत्तों को मप्र पुलिस के लिए ट्रेनिंग दी जाती थी। लेकिन मप्र पुलिस के बेडे़ में शुमार यह देशी डॉग्स अब जांच में पुलिस की मदद करेंगे। जीहां,  मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में यह पहला मौका है। जब देशी  ब्रीड के डॉग्स में भरोसा जताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार राजधानी के भदभदा रोड स्थित 23 वीं बटालियन के डॉग स्क्वॉड का मुख्यालय में देशी ब्रीड के छह पपीज(कुत्ते के बच्चों) को ट्रेनिंग के लिए लाया गया है। यहां पर इन सभी को ट्रेनिंग देकर स्नेफर, ट्रेकर डॉग बनाया जाएगा।  मप्र  पुलिस ने 10 जोड़ी देसी नस्ल के पपीज खरीदे हैं। इन पप्स में 6 देसी नस्ल के  मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, राजा पलायम, कन्नी, कोम्बाई और चिप्पीपराई हैं।

जानें कुत्तों की इन देशी नस्ल के बारे में ####

 कोम्बाई डॉग (Combi Dog) को साइलेंट किलर (Silent Killer) भी कहा जाता है। क्योंकि यह चुपचाप तरीके से अपने काम को अंजाम देने में माहिर होते हैं। कोम्बाई का नाम तमिलनाडु के एक शहर के नाम पर पड़ा है। ये घर के बाहर बैठकर चुपचाप नजर रखते हैं और घर या किसी भी जगह में दाखिल होने वाले संदिग्ध लोगों पर हमला कर देते हैं। सीआरपीएफ ने इस नस्ल को भर्ती किया है.इसकी औसत उम्र 12 से15 साल होती है।

 मुधोल हाउंड (Mudhol Hound Dog) जर्मन शेफर्ड से भी तेज होता है। इसकी रफ्तार चीते जैसी है.कर्नाटक के बगलकोट के मुधोल की यह प्रजाति शिकार और रफ्तार में जर्मन शेफर्ड से तेज मानी जाती है.इसे कैरावान भी कहते हैं। स्वामिभक्ति के लिए भी इसे जाना जाता है। इसी कारण इसे 2017 में भारतीय सेना में शामिल किया गया, बाद में इसकी पहचान स्नाइफर डॉग के तौर पर उभरी.इसकी औसत उम्र 10 से 12 वर्ष होती है।

राजा पलायम डॉग (Raja Palayam Dog) इसकी 20 साल की औसत उम्र होती है. इस डॉग के सम्मान में 9 जनवरी 2005 को 15 रु. कीमत का डाक टिकट जारी किया था। इनका नाम तमिलनाडु के राजापलयम शहर के नाम पर रखा है। यह सुअर के शिकार और रखवाली के लिए जाने जाते हैं।

 कन्नी डॉग  तमिल में कन्नी का मतलब शुद्ध होता है। बेहद वफादार होने के कारण इस नस्ल का नाम कन्नी रखा गया है। यह (Kanni Dog) डॉग जंगली जानवरों के शिकार में माहिर होते हैं। इन्हें जमींदार पाला करते थे। कन्नी की औसत उम्र 14 से 16 वर्ष होती है।

चिप्पीपराई डॉग (Chippiparai Dog) सबसे ऊंची छलांग लगाने में माहिर होते हैं। यह किसी भी स्थिति से निपटने और किसी का भी पीछा करने में उस्ताद माने जाते हैं। हर बाधा को पार करने में इन्हें महारथ हासिल है। तमिलनाडु के मदुरै के शहर चिप्पीपराई पर इनका नाम पड़ा है, जो केरल की पेरियार झील के पास भी मिलते हैं। रफ्तार 10 फीट तक की छलांग लगाना इनकी खूबी है.इनकी उम्र 12 से15 वर्ष होती है।

रामपुर ग्रेहाउंड (Rampur Grey Hound) नस्ल के डॉग सबसे बड़े शिकारी होते हैं.  20वीं शताब्दी की शुरुआत में रामपुर के नवाब अहमद अली खान ने अफगान हाउंड इंग्लिश ग्रेहाउंड की क्रॉस ब्रीड से यह नस्ल तैयार की थी। इसे शिकार के लिए तैयार किया था. इसकी उम्र 13 से14 वर्ष होती है.।

 

 

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