1500 से ज्यादा लावारिस और निर्धनों के शवों का अंतिम संस्कार करने वाली हीरा बुआ का निधन

1500 से ज्यादा लावारिस और निर्धनों के  शवों का अंतिम संस्कार करने वाली हीरा बुआ का निधन
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mp03.in संवाददाता भोपाल 

राजधानी के  हमीदिया अस्पताल में आया के पद पर बरसों से पदस्थ  54 वर्षीय हीरा बाई परदेसी उर्फ हीरा बुआ का शनिवार को डेंगू से एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह बीते चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थी।  वह डेंगू होने के बाद पिछले चार दिनों से निजी अस्पताल में भर्ती थी। जहां उनकी ब्लड की  प्लेटलेट्स 9 हजार तक पहुंच गई थी। शनिवार रात उनका अंतिम संस्कार छोला विश्राम घाट पर किया गया।

मालूम हो कि हीरा बाई अपने काम के अलावा लोगों की मदद करने के लिए ज्यादा पहचानी जाती थीं। वह लावारिस शवों को मोक्ष दिलाने के लिए अपने खर्चे पर अंतिम संस्कार करती थीं। उन्होंने 1500 से ज्यादा लावारिस और निर्धन परिवार के शवों का अंतिम संस्कार किया।कई बार हीरा बुआ भदभदा विश्राम घाट पर कई शवों को लेकर अकेली जाती थीं।  उन्होंने एक बार खुद एक शव को मुखाग्नि दी।
निर्धन परिवार को खाने के पैसे दे देतीं
हमीदिया अस्पताल में उनके साथ लंबे समय तक काम करने वालों ने बताया कि वह दूसरों की मदद तन, मन और धन से करती थीं। वह आया कि नौकरी करती थीं। फिर भी अंतिम संस्कार करने आए लोगों की हालत देखकर अपने पास से खाने के लिए पैसे दे देती थीं, जबकि वह अस्पताल में सिर्फ आया थीं। हीरा बाई स्टाफ की मदद करने के लिए भी तैयार रहती थीं। उनको कभी कोई काम बता दें, तो मना नहीं करती थीं। वह सभी धर्मों के लोगों की एक भाव से सेवा करती थीं।

28 नवंबर को बेटे की शादी
हीरा बाई अपने बेटे मोहित परदेसी के साथ पुराने शहर के मालीपुरा में रहती थी। उनके पति की 13 साल पहले मौत हो चुकी थी। उनके एक परिचित ने बताया कि मंगलवार को उनको बुखार आने पर संदर मंजिल स्थित चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि उनके बेटे मोहित की 28 नवंबर को शादी है। भोपाल के बुधवारा में रिश्ता तय हुआ है। हीरा बाई ने बहू के लिए शॉपिंग भी कर ली थी। मेरिज गार्डन भी बुक करवा दिया था। वह बेटे की शादी से पहले ही चली गई।

दूसरों की मदद के लिए आगे रहती
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे ने कहा कि कुछ दिनों से वह छुट्टी पर थीं। उन्होंने कभी बीमारी के लिए छुट्टी नहीं ली। हमेशा कमजोर और बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे रहती थीं।

 

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