आयुष्मान याेजना के तहत फर्जी मरीजों के नाम पर सरकारी पैसा हड़पने की कोशिश करने वाले डाॅक्टर पर एफआईआर

आयुष्मान याेजना के तहत फर्जी मरीजों के नाम पर सरकारी पैसा हड़पने की कोशिश करने वाले डाॅक्टर पर एफआईआर
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mp03.in संवाददाता भोपाल 

 बैरसिया रोड स्थित एक निजी अस्पताल में संचालक के खिलाफ गौतम नगर पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि संचालक ने अस्तपाल में तीन फर्जी मरीजों को भर्ती किया। उनके नाम पर आयुष्मान योजना के तहत लाखों रुपए की राशि सरकारी योजना के तहत हड़पना चाही।  स्वास्थ्य संचालनालय की टीम ने क्लेम को चेक करने के लिए अस्पताल में विजिट किया। जहां फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर शिकायती आवेदन पुलिस को दिया गया। पुलिस ने जांच के बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने का प्ररकण दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
एएसआई आरके गौड़ ने बताया कि बैरसिया रोड पर गुरुआशीष अस्पताल है। जिसका संचालन डाक्टर संदीप दुबे करते हैं। बीती 14 जून को इस अस्पताल में स्वास्थ्य संचालनालय की टीम ने विजिट किया था। दरअसल अस्पताल की ओर से तीन पेशैंट  के नाम से आयुष्मान योजना के तहत फाइल अपलाई की गई थीं। इन तीनों को देखने टीम पहुंची थी। टीम के पहुंचने पर यह तीनों मरीज अस्पताल में नहीं मिले। जांच में पाया गया कि तीनों मरीजों को जिस तरह की बीमारी बताकर रकम लेना चाही गई थी, उस प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी। लिहाजा टीम ने रिपोर्ट बनाकर अपने विभाग के प्रमुख को सौंपी। विभाग प्रमुख ने भी जांच में पाया कि जिन नामों से इलाज की रकम लेने के लिए आवेदन भेजा गया था, वह लोग अस्पताल में भर्ती नहीं मिले। इसी के साथ जिन बीमारियों का हवाला देकर रकम चाही गई थी, उन बीमारियों का कोई भी पेश्यंट अस्पताल में भर्ती नहीं मिला। लिहाजा स्वास्थ्य संचालनालय की अयोग शाखा के प्रमुख डॉक्टर पदमाकर त्रिपाठी की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। आरोपी संदीप दुबे की फिलहाल गिर तारी नहीं की जा सकी है। पुलिस का कहना है कि जल्द गिर तारी के लिए डाक्टर को नोटिस जारी किया जाएगा।
– चार करोड़ का फर्जीवाड़ा सामने आया 
पुलिस सूत्रों की माने तो विभाग की ओर से डाक्टर संदीप दुबे द्वारा पूर्व में सैकड़ो मरीजों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर करीब तीन करोड़ रुपए हड़पे जा चुके हैं। अस्पताल प्रबंधन बड़ी संख्या में आयुष्मान कार्ड से इलाज के कर मरीजों की फाइलें विभाग में भेज रहा था। नजर में आने के बाद में टीम में अस्पताल की विजिट की थी। तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

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