नौकरी लगवाने का झांसा देकर बेरोजगारों से बैंक एकाउंट खुलवाकर सायबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

नौकरी लगवाने का झांसा देकर बेरोजगारों से बैंक एकाउंट खुलवाकर सायबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
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– बेरोजगार युवक युवतियों को जॉब का लालच देकर खुलवाते थे खाता।
– सेलरी के लिये खाता पासबुक/एटीएम व सिमकार्ड लेकर करते हैं फ्रॉड 
– खाता पासबुक लेकर नेटबैकिंग चालू करके सिम अपने पास रख लेते हैं
– फरियादी के खाते से 1 माह में 41 लाख रुपये का ट्रान्जेक्शन किया गया है।
– आरोपियों से बेरोजगारों के खुले हुए बैंक पासबुक मय एटीएम कार्ड जब्त
– आरोपियों ने फ्रॉड के रूपयों से खरीदे गये 8 स्मार्टफोन सहित कुल 22 मोबाईल फोन
– आरोपियों से एक स्कारपियो वाहन और 02 देशी कट्टे भी  बरामद।

mp03.in संवाददाता भोपाल 

प्रायेवट कंपनियों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर बेरोजगार युवक-युवतियों से बैंक एकाउंट खुलवाकर सायबर ठगों को बेचने वाले शातिर गिरोह का सायबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में भोपाल और बिहार से करीब 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, आरोपियों से 25 बैंक पासबुक, 22 एटीएम कार्ड, 22 मोबाइल फोन मय सिमकार्ड, 18 सिमकार्ड, 2 देशी कट्टे और एक स्कार्पियो गाड़ी बरामद की है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों विभिन्न राज्यों में करीब पांच सौ बेरोजगार युवाओं से इस प्रकार के खाते खुलवाकर सायबर ठगी करने वालों को बेच चुके हैं।
पुलिस उपायुक्त साई कृष्ण थोटा ने बताया कि पिपलानी निवासी  युवती को नौकरी का झांसा देकर जालासाजों ने बैंक खाता खुलवाया था। जिसके बाद जालसाजों ने युवती के बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास रख लिया। जिसके बाद उक्त खातें में एक महीने के दौरान 41 लाख रूपए का अवैध ट्रांजेक्शन किया। जिसकी जानकारी बैंक अधिकारी ने पीड़िता के घर जाकर दे दी। जिसके बाद पीड़िता की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कर जांच शुरु की गई। तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में आयुष लिटोरिया और निखिल शर्मा दोनों निवासी पिपलानी भोपाल के साथ ही मोहम्मद अजरुद्दीन निवासी चंपारण बिहार, कुंदन कुमार सिंह निवासी सासाराम जिला रोहतास, आलोक कुमार यादव निवासी चंपारण बिहार और राहुल आलम निवासी चंपारण बिहार को गिरफ्तार किया है। आयुष और निखिल बेरोजगारों से बैंक एकाउंट खुलवाते थे और बाकी चारों आरोपी इन खातों को सायबर ठगों तक पहुंचाने का काम करते थे। आरोपियों ने ठगी के रुपयों से ही स्कार्पियो गाड़ी खरीदी थी, जिससे वह देश के दूसरे राज्यों में घूमकर इस प्रकार की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। आरोपी अपने साथ देशी पिस्टल भी रखते थे।
इस प्रकार देते थे वारदात को अंजाम
आरोपी आयुष बेरोजगार लोगों से संपर्क कर निजी कंपनी में नौकरी दिलवाने का झांसा देता था। उसके बाद बैंक में एकाउंट खुलवाता था। एकाउंट ओपन करने के लिए वह अपनी कंपनी का बताकर मोबाइल नंबर देता था, ताकि खाता खुलवाने वाले के पास कोई मैसेज नहीं पहुंचे। खाता खुलवाने के बाद वह सैलरी के वेरीफिकेशन के लिए पासबुक और एटीएम कार्ड ले लेता था। खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर इंटरनेट बैकिंग चालू करके वह सायबर ठगों को बेच देता था। सायबर ठग इन खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए करते थे। सायबर ठगों की एक पूरी चेन होती है, जो एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। आरोपी अजरुद्दीन उर्फ एमडी इस गिरोह का मास्टर माइंड बताया गया है। वह भोपाल में रहकर पढ़ाई कर चुका है। आलोक कुमार बारहवीं पास है, जबकि बाकी आरोपी स्नातक और इंजीनियरिंग कर चुके हैं।
इनकी रही सराहीय भूमिका
आरोपियों को गिरफ्तार करने में निरीक्षक जयवंत सिंह, एसआई भरतलाल प्रजापति, देवेन्द्र साहू, हेड कांस्टेबल मयंद सिंह, प्रतीक, आरक्षक तेजराम, आदित्य, मनोज, सुमित, अंकित मिश्रा, उदित, रुपेश, आशीष, अजीत और महिला आरक्षक हेमा की सराहनीय भूमिका रही।

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