मुख्यमंत्री के जिले में 60 करोड़ दवा घोटाले के साक्ष्य मिटाने में सीएमएचओ डॉ प्रभाकर तिवारी भूमिका!

मुख्यमंत्री के जिले में 60 करोड़ दवा घोटाले के साक्ष्य मिटाने में सीएमएचओ डॉ प्रभाकर तिवारी भूमिका!
Share on social media

–  फरियादी के बयानों में उजागर हुआ सीएमएचओ डॉ प्रभाकर तिवारी का नाम

  • आरोप तत्कालीन सीएचएमओ ने खुद भी फर्जी टेंडरों की दरों से करोड़ों की खरीदी की

mp03.in संवाददाता भोपाल 

मुख्यमंत्री के जिले सीहाेर के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने ढाई लाख के छोटे टेंडर की आड़ में 60 करोड़ का फर्जी रेट कांट्रेक्ट (दर अनुंबध) का टेंडर घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेष्ण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और हबीबगंज थाना पुलिस ने एक फार्मा कंपनी, सीएचएमओ कार्यालय सीहोर के स्टोर कीपर समेत आधा दर्जन आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, कूट रचित दस्तावेज बनाने और साक्ष्य मिटाने की धाराओं व भष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 व संशोधन अधिनियम 2018 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। इस मामले में हालही में हुए फरियादी योगेद्र सिंह तोमर के कथन में सीहोर के तत्कालीन सीएचएमओ डॉ प्रभाकर तिवारी का नाम भी उजागर हुआ है। तोमर ने पुलिस और ईओडब्ल्यू को दिए अपने बयान में बताया कि इस फर्जी टेंडर के माध्यम से तय दरों पर वर्ष 2017, 2018 व 2019 की अवधि में तत्कालीन सीएमएचओ डीआर अहिरवार और तत्कालीन सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी द्वारा जमकर खरीदारी की गई। फरियादी ने बताया कि 2019 में मामले की ईओडब्ल्यू और हबीबगंज में शिकायत की भनक लगने पर तत्कालीन सीएचएमओ डॉ प्रभाकर ने इस प्रकरण से संबंधित टेंडरों की फाइलें गायब करवा दीं गईं।

ऐसे खुला राज :

फर्जी वाडे़ की भनक लगते ही फरियादी आरटीआई के माध्यम से टैंडर नंबर 16970 में दवा खरीदी व उपकरणों की जानकारी मांगी गई, जोकि 27 अगस्त 2019 को तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी के हस्ताक्षर से उन्हें अधूरी जानकारी प्राप्त हुई। जब फरियादी ने दिसंबर 2019 में दोबारा सूचना आयुक्त में अपील कर पूर्ण जानकारी मांगी, जिसपर कार्यालय द्वारा टेंडर से संबंधित किसी भी प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध न होना बताया। वहीं, पुलिस व ईओडब्ल्यू द्वारा सीहोर कार्यालय से जानकारी मांगने पर दस्तावेज न होना बताकर टाल दिया गया।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा

जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा सितंबर 2017 में अंधत्व निवारण कमेटी के लिए
चश्में व आंखों की दवाओं का करीब ढाई लाख की खरीदी का रेट कांट्रेक्ट की निविदा जारी की गई।
अब कार्यालय ने इसी रेट कांट्रेक्ट में आई निविदाओं में शामिल पांच प्रतिभागी कंपनियों के दस्तावेजों
(डिमांड ड्राफ्ट, मेडकिल लाइसेंस, गुमाश्ता, रेट लिस्ट) का इस्तेमाल कर पुराने अंधत्व टेंडर के अखबारों में प्रकाशित हो चुके जी क्रमांक 16970 को दोबारा इस्तेमाल कर नया टेंडर बनाकर मुकेश मालवीय की फर्म संजय मेडकिल और उनके परिवार की फर्मों आन्या फर्म, महाकाल फर्म को 60 करोड़ का टेंडर दे दिया गया।

फरियादी के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल
दोनों ही ट्रेंडरों में योगेंद्र सिंह तोमर की बगैर अनुमति के उनकी फर्म पर्व इंटरप्राइजेज को प्रतिभागी बनाया गया। टेंडरों में उनकी फर्म गुमाश्ता, मेडकिल लाइसेंस, डिमांड ड्राफ्ट का उपयोग किया गया। रौचक पहलू यह है कि जांच में पाया गया कि पर्व समेत सभी प्रतिभागी कंपनियों के एक ही डाफ्ट का इस्तेमाल दोनों ही टेंडरों में किया गया है। वो भी एक ही दिन दोनों टेंडर खोले गए।
इनका कहना:
हमने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ प्रभाकर तिवारी को इस घोटाले की मौखिक व लिखित शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने मामले की विभागीय या शिकायत करने बजाए खुद भी इन्हीं फर्जी टेंडरों की दरों पर खरीदी की। जब हमने इस मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू में कर दी, तो डॉ तिवारी ने कार्यालय में मौजूद इन फर्जी टेंडरों के दस्तावेज और नस्तियों का गायब करवा दिया।

योगेंद्र सिंह तोमर, प्रोपेराइट पर्व इंटरप्राइजेज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *